Published On: Fri, Dec 23rd, 2011

Hazar Joote : Akbar and Birbal stories in hindi : Akbar Birbal Jokes

Akbar and Birbal (pronounced as Beerbal) stories are very famous and popular in India among all ages of people.


akbar and birbal Stories in Hindi Akbar birbal jokes

There was a Mogul Emperor in India, Akbar the Great (1542-1605). His full name was Jalaludden Mohammed Akbar Padshah Ghazi and he ruled India from 1560 to 1605. He himself was illiterate, but he invited several learned people in his court. Among these people, nine were very famous and were called “Nav Ratna” (nine jewels of the Mogul Crown) of his court. Among these nine jewels, five people were more famous – Tansen, Todarmal, Abul Fazal, Maan Singh and Birbal.

1. Tansen for his singing art,
2. Dasvant – a great painter
3. King Todarmal was a financial wizard,
4. Abdu us-Samad – a brilliant calligrapher and designer of Imperil coins
5. Abul Fazal was a great historian whose brother
6. Faizi was a great poet,
7. Mir Fareh-ullah Shirazi – financier, philosopher, physician and astronomer,
8. King Maan Singh for his chivalry, and
9. Birbal for his valuable advice.

Akbar’s son Prince Sultan Salim, later known as Jehangir (pronounced as Jahaangeer), wrote that nobody could make out that Akbar was an illiterate. Akbar was a very hard-working King. It is also said about him that he slept only three hours a night.

Birbal (1528-1583) is surely one of the most popular figures in Indian history equally regarded by adults and children. Birbal’s duties in Akbar’s court were mostly administrative and military but he was a very close friend of Akbar too, because Akbar loved his wisdom, wit, and subtle humor. He was a minister in the administration of Mogul Emperor Akbar and one of the members of inner council of nine advisors. He was a poet and an author too.

It is believed that he was a son of poor Braahman of Trivikrampur (now known as Tikavanpur) on the banks of River Yamuna. According to a popular legend he died on an expedition to Afghanistan at the head of a large military force due to treachery. It is also said that when Birbal died, Akbar mourned him for several months.

The exchanges between Akbar and Birbal have been recorded in many volumes. Many of these have become folk stories in Indian tradition. Birbal’s collection of poetry published under the pen name “Brahm” are preserved in Bharatpur Museum, Rajsthan, India.

Many courtiers were jealous with Birbal and often plotted for his downfall. There are many stories found on this issue too. There are a couple of other stories too which are of the same time and type and are as interesting as Birbal’s ones.

हज़ार जूते Akbar Birbal jokes in Hindi :) Irrshad hai.

अकबर (Akbar) बाद्शाह को ठ्ट्ठेबाजी का बहुत शौक था और देबयोग से बीरबल (Birbal) भी बडा  ठ्ट्ठेबाज़ था। एक बार बाद्शाह ने हँसी  मे बीरबल के जुते उठ्वा लिए। चलते-चलते बीरबल जूते ढूंढ्ने लगे। जब जूते न मिला तो अकबर ने सेवक से कहा कि अच्छा हमारी ओर से इन को जूते दे दो। यह सुन सेवक ने जूते पहना दिया।

बीरबल ने जूते पहन कर आर्शीवाद दिया कि परमेश्वर आप को इस लोक और परलोक ने ऐसे हज़ारो जुते दे। सुनते ही अकबर खिलखिला कर हँस पडे।

गधे तम्बाकू नही खाते

बीरबल को तम्बाकू खाने की आदत थी लेकिन अकबर (Akbar) न खाते थे एक दिन अकबर ने तम्बाकू के  खेत मे गधे को घास खाते देखकर कहा बीरबल ये देखा तम्बाकू कैसी बुरी चीज है, गधे तक इस को नही खाते ।

इस पर बीरबल (Birbal) ने कहा- हाँ हुजुर सच है । गधे तम्बाकू नही खाते । यह सुन बाद्शाह शर्मिन्दा हुऐ।


अकल की दाद

एक दिन बाद्शाह अकबर ने कागज़ पर पैन्सिल् से एक लम्बी लकीर खीची और बीरबल को बुला कर कहा- बीरबल न तो यह लकीर घटाई जाए और न ही मिटाई जाए लेकिन छोटी हो जाए? बीरबल (Birbal) ने फौरन उस लकीर के नीचे एक दुसरी लकीर पैंसिल से बडी खीच दी । यह देखिए जहांपना ! बीरबल बोले- अब आप की लाकीर इस से छोटी हो गयी। बादशाह यह देखकर खुश हुए और मन ही मन उन की अकल की दाद देने लगे।


हर वक्‍त कौन चलता है

एक दिन बाद्शाह ने दरबारियों से पूछा कि हर समय कौन चलता है उत्तर मे किसी ने पृथ्वी,  किसी ने चन्द्रमा को बताया तथा किसी ने हवा आदि को बताया ।

बादशाह ने यह प्रश्‍न बीरबल (Birbal) से पूछा तो उन्होने उत्तर दिया की अली जहां ! महाजन का ब्याज हर समय चलता रह्ता है इसे कभी थकावट नही होती। दिन दुगनी और रात चौगुनी वेग से चलता है । बाद्शाह को यह उत्तर पसंद आया।


छेड छाड

अकबर (Akbar) बादशाह और बीरबल मे अकसर मज़ाक होता रहता था । उस दिन वे दोनो एक दुसरे से छेड-छाड कर रहे थे ।

बाद्शाह ने कहा- बीरबल (Birbal)तुम्हारी स्त्री अत्यन्त सुन्दर है । बीरबल ने कहा – हां सरकार! पहले मै भी ऐसा ही समझता था। पर जब से बेगम साहिबा को देखा है, मै अपनी स्त्री को ही भूल बैठा हूँ ।

बाद्शाह एकाएक झेंप गए और उस दिन के बाद से फिर उन्होने ऐसा मज़ाक नही किया ।


आपकी बारी कैसे आती?

बाद्शाह ने बीरबल(Birbal) से कहा, जो बादशाह होता वह सदैव ही शासन करता रहता तो कैसा अच्छा होता?

बीरबल ने तत्काल स्वाभाविक नम्रता पूर्ण उत्तर दिया, जहांपनाह! आपका कहना बिलकुल उचित है किन्तु यदि ऐसा होता तो भला सोचिए कि आप बादशाह कैसे होते? बाद्शाह बीरबल के व्यंग को समझ चुप हो गए।


हाँ मिहरबान

एक दिन बादशाह बीरबल(Birbal) से बोले, ’ जिन लोगो के नाम के अन्त मे या उनकी पदवी के आखिर मे वान शब्द होता है, वो बडे ही झगडालू होते हैं। जैसे एक्केवान, गाडीवान, पीलवान और दरबान इत्यादि।

बीरबल ने स्वीकृति मे कहा, हाँ मिहरबान! बाद्शाह झेंप गए, क्योकि बीरबल ने उनकी भी उन सबों की कोटी मे ही गणना की


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